रावण के दुष्कर्म से परेशान अप्सरा की पुत्री मंदोदरी ने रावण को बहुत समझाया कि वह सीता को वापस श्री राम के पास भेज दे क्योंकि सीता उसकी मृत्यु का कारण बनेगी यह भविष्यवाणी हो चुकी थी और रावण खुद अपने पाँव पर कुल्हाड़ी मार रहा था लेकिन उस वक्त रावण अपने अभिमान में चूर था क्योंकि उसने देवता से बल प्राप्त कर लिया था।
रावण की लंका में महान पंडित, मंत्री, मायावी राक्षस और सभी ग्रह भी सर झुकाते थे वे रावण को मार्गदर्शन भी देते लेकिन वह उनका भी अपमान करता था लेकिन जब रावण के भाई विभीषण ने रावण ने माता सीता को लौटाने की विनती की, तो उसने अपने भाई को भी लंका से बहार निकाल दिया था ऐसे में रावण का अंत निश्चित था लेकिन डर से कोई उसके सामने बोल नहीं सकता था।
रावण की मृत्यु के बाद श्री राम ने विभीषण को लंका का नया राजा बना दिया था लेकिन मंदोदरी इस बात से बहुत दुखी हो चुकी थी इसलिए वह कई वर्षों तक बंद कमरे में रहने लगी थी परन्तु इसके बाद प्रजा के कल्याण के लिए रावण की पत्नी ने विभीषण के साथ विवाह कर लिया था और श्री राम ने खुद उनका राज्य अभिषेख करवाया था।
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