प्राचीन इतिहास के पन्नों को पलटनें पर यहीं पता चलता है कि रावण रामायण काल का सबसे शक्तिशाली राजा था, रावण के जैसा कोई व्यक्ति आज तक हुआ ही नहीं वह पूरे संसार को अपनी इच्छा अनुसार चलने की शक्ति रखा था। आज हम आपको रावण के जन्म की पूरी कहानी बताने जा रहे है जिसका वर्णन शास्त्रों में मिलता है।
ऋषि के घर जन्म हुआ रावण का-
यह बात रामायण से पूर्व की है जब दैत्य और देव आपस में लड़ते रहते थे लेकिन देवताओं के पास सत्य की शक्ति होती थी इसलिए सदैव उनकी विजय हो जाती थी। दानव देवताओं को नीचे गिराकर स्वर्ग लोक पर अपना राज्य स्थापित करना चाहते थे इसलिए उन्होंने अपने गुरु से आज्ञा लेकर एक माया रची थी। दानवों की पुत्री केशिनी ऋषि विश्राव को मन ही मन पसंद करती थी।
दानवों ने युक्ति के साथ केशिनी को ऋषि विश्राव के हाथ में सौंप दिया, विश्राव त्रि-लोक ज्ञानी थे वे जानते थे कि यदि केशिनी से उनका विवाह हो गया तो जो पुत्र जन्म लेगा वह राक्षसी गुणों को धारण करेगा यह जानने के बावजूद ऋषि ने केशिनी को स्वीकार कर लिया।
ऋषि विश्राव ने केशिनी से विवाह कर लिया और उनके तीन पुत्र जन्मे जिसमें रावण और कुंभकरण तामसी गुणों का स्वामी बना, परन्तु विभीषण अपने पिता के नक़्शे कदम पर चलने वाला भक्त बन गया था।
शक्तिशाली योद्धा बना रावण-
रावण भले ही राक्षसी गुणों वाला राजा हुआ परन्तु उसके अंदर अपने पिता के समान लक्षण भी थे, वह महादेव का परम भक्त हुआ। रावण ने तपस्या के बल से सभी तरह के दिव्य अस्त्र प्राप्त कर लिए थे। वह तीनों लोको का स्वामी बनना चाहता था प्राचीन समय में कोई ऐसा राजा नहीं था जो रावण का सामना कर सकें, इसलिए राम अवतार विष्णु को दसरथ के घर में जन्म लेना पड़ा था।
यदि आप भी ऐसी पौराणिक जानकारी पढ़ने में रूचि रखते है तो नीचे दिया गया फॉलो एवं लाइक बटन दबाकर अपना कीमती सुझाव कमेंट करके अवश्य बताए।
No comments:
Post a Comment