हर व्यक्ति चाहता है कि वह सुखी जीवन व्यतीत करें और इसके लिए वह दिन रात मेहनत भी करता है लेकिन इसके बावजूद कई लोगों को सफलता नहीं मिल पाती, ऐसे व्यक्ति पूरी तरह से हताश हो जाता है। कभी कभी ऐसा भी देखने मिलता है कि आपसे कम क्षमता वाले लोग बड़ी ही तेज़ी से प्रगति कर जाते है मतलब जो कार्य करने के लिए हमें सालों लग जाते है उसे वे कुछ ही समय में कर दिखाते है।
लेकिन सच्चाई यह है कि दोनों ही स्थिति में इंसान दुखी ही रहता है क्योंकि जो व्यक्ति किसी कार्य में सफल हो जाता है वह दूसरों के जैसा बनने की कोशिश करता है। जैसे धनवान व्यक्ति को एक ही बात की चिंता रहती है कि वह किस तरह से और ज्यादा पैसा कमा पाए और असफल लोग सफलता नहीं कर पाने के कारण दुखी रहती है।
भगवान बुद्ध ने इस बात को स्पष्ट करते हुए अपने शिष्य को समझाया, कि मनुष्य की सबसे बड़ी खुशी उसके ख़ुश रहने में है ख़ुशी कई प्रकट नहीं होती वो पहले से ही हमारे अंदर मौजूद है लेकिन हम दुनिया के लक्ष्य को ही ख़ुशी मान लेते है। दुनिया की एक अटल सच्चाई यह है कि मनुष्य को जीवन की सारी ख़ुशियाँ भी मिल जाए उसके बाद भी वह किसी ना किसी चीज़ का भूखा ही रहता हो, और यही इच्छा मनुष्य के दुःख का कारण बन बैठी है।
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