हर व्यक्ति दूसरे से बराबर मेहनत करता है लेकिन इसके बावजूद उन्हें जल्दी सफलता नहीं मिलती, जबकि उसका प्रतिस्पर्धी तेज़ी से आगे बढ़ जाता है। जब किसी व्यक्ति को जल्दी सफलता नहीं मिलती तो वह निराश होकर अपनी किस्मत को दोष देने लगता है ऐसे में स्वामी विवेकानंद के द्वारा बताया सूत्र हर व्यक्ति की मदद करेगा।
स्वामी विवेकानंद एकांत वातावरण में ध्यान कर रहे थे उसी समय एक दुःखी व्यक्ति आकर बोला कि मैंने सफलता प्राप्त करने के लिए सभी मुमकिन प्रयास किए लेकिन जिंदगी के इस खेल में मेरे मित्र मुझसे भी आगे निकल गए और मैं पीछे रह गया। स्वामी जी के सामने एक कुत्ता खड़ा था उन्होंने कुत्ते की ओर इशारा करते हुए बताया कि जाओ इसे घुमा कर लेकर आओ।
वापस आने पर कुत्ता थक गया, स्वामी बोले कि देखो तुम दोनों एक ही रास्ते से आए हो लेकिन इसके बावजूद कुत्ता जल्दी थक गया क्योंकि यह जिस ग़ली से गुजरा वहाँ के कुत्तों को भोकता हुआ चला आया और तुम सीधे सीधे मार्ग पर चल रहे थे। ठीक इसी तरह हर व्यक्ति जो सफल होना चाहता है वह अपने मार्ग पर सीधा चलता है लेकिन जो लोग अपनी तुलना दूसरों से करते है वे मार्ग से भटक जाते है।
No comments:
Post a Comment