एक समय मनोवैज्ञानिक सभी छात्रों को बुरे वक्त को दूर करने के लिए समझ दे रहे थे, उन्होंने आधे पानी से भरे ग़िलास को उठाया और छात्रों से पूछने लगे कि इसमें कितना पानी है। इस सवाल को सुनकर कुछ छात्रों ने कहा थोड़ा पानी, कुछ बोले आधा लीटर लेकिन किसी के पास सही जवाब मौजूद नहीं था।
सर बोले कि इसमें कितना पानी है इस बात से हमे कोई फ़र्क नहीं पड़ता, लेकिन इस ग़िलास को कितने समय में हम हाथ में रख सकते है यह ज़रूरी है क्योंकि अगर में इसे थोड़ी देर पकड़ कर रखता हु तो कुछ नहीं होगा लेकिन एक घंटे तक ऐसे ही खड़ा रहु तो इसका वजन भारी लगेगा और इससे भी ज्यादा समय तक पकड़ के रखा तो हाथ सुन्न पड़ जायेगा।
ठीक ऐसा ही हमारे दुखों के साथ होता है इसलिए बुरा समय आने पर उस विषय में अधिक विचार करने से दिमाग का बोझ इतना बढ़ जाता है कि व्यक्ति पागल हो सकता है। जब आपका समय ख़राब चले तो विचार ने से ज्यादा समस्या को कैसे हल करें, इस बात पर ध्यान देना चाहिए।
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