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Saturday, September 2, 2017

महापंडित रावण की 4 अच्छाइयाँ जिसको कोई नहीं जानता

आज जिस लंकापति रावण को दुनिया बुराई की नजर से देखती है वही रावण के अंदर पांच अच्छी बातें भी थी जिसके प्रमाण हमको शास्त्रों में मिलते है। आज के समय में यदि आपका दुश्मन आपसे मदद मांग ले, तो आप कभी उसकी मदद नहीं करेंगे लेकिन रावण ने जो किया वह सुनकर आप भी सोच में पड़ जायेंगे क्योंकि रावण एक पंडित का पुत्र था इसलिए वह चारों वेदों का ज्ञान रखता था।

महापंडित रावण की 5 अच्छाई जिससे दुनिया अनजान है -

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पहली अच्छाई :जब श्री राम वानरों के साथ लंका विजय के लिए निकले तभी रामेश्वरम में उनको विजय यज्ञ करना था जिसके लिए देवताओं के गुरु बृहस्पति को निमंत्रण दिया गया लेकिन वे आने में असमर्थ थे इसलिए श्री राम ने सुग्रीव से कहा कि - लंकापति रावण को बुलाओ क्योंकि रावण धर्म से बाहृमण था। राम के बुलावे पर रावण यज्ञ में पुष्पक विमान के साथ पहुंचे और यज्ञ को सम्पन्न करवाया था उसके बाद राम को विजय होने का आशीर्वाद भी दिया था। जब लोगों ने आश्चर्य से रावण को पूछा कि आपने राम को विजय होने का आशीर्वाद क्यों दिया? रावण ने कहा कि यह आशीर्वाद लंकापति रावण ने नहीं बल्कि महापंडित रावण ने दिया है।
दूसरी अच्छाई :रावण बहुत अहंकारी था और उसको समस्त लोको पर अपनी सत्ता जमानी थी लेकिन वह सबसे बड़ा शिवभक्त भी था। उस समय में भगवान शिव का कोई सच्चा भक्त था तो वह सिर्फ रावण क्योंकि आज हम जो शिव तांडव स्त्रोत का पाठ करते है वह रावण की ही देन है।
तीसरी अच्छाई :राजनीती का महापंडित रावण जानता था कि उसकी मृत्यु श्री राम के हाथों होने वाली है। जब रावण युद्ध मृत्युशैया पर पड़ा था तब श्री राम लक्ष्मण को रावण के पास राजनीती का ज्ञान लेने भेजते है। उस समय रावण लक्ष्मण को गुप्त रहस्य बताते है।
चौथी अच्छाई :महानपंडित रावण माता सीता का अपहरण कर लंका ले गया था लेकिन उसने सीता को महल में रखने के बजाए अशोकवाटिका में रखा था उसने कभी माता सीता को छुआ तक नहीं था। जिसके पीछे एक कारण रावण को मिला श्राप था कि यदि वह बिना आज्ञा किसी स्त्री से प्रेम करेगा तो उसकी मृत्यु हो जाएगी।

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