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Sunday, September 3, 2017

महापंडित रावण ने लक्ष्मण को बताई थी 5 गुप्त बातें

रावण की माता राक्षसी और पिता ऋषि थे जिसके कारण रावण में एक पंडित और दैत्य के गुण थे। इस संसार में आप कितने भी अच्छे कर्म कर लो लेकिन आपके द्वारा किया गया एक बुरा कर्म आपकी नीचे गिरा देता है। महानपण्डित रावण के साथ भी ऐसा ही हुआ और उसने माता सीता का अपहरण कर दिया था जिसके कारण श्री राम के हाथों मारा गया।

रावण ने अपनी मृत्यु से पहले लक्ष्मण को राजनीति का ज्ञान दिया था जो आज के समय में भी उपयोगी होता है दूसरी बात यह की रावण एक बाहृमण का पुत्र था जिससे वह वेद और शास्त्रों का ज्ञाता भी था, ज्योतिष शास्त्र के पीछे रावण का ही योगदान है। जब रावण को श्री राम ने युद्ध में घायल कर दिया तब लक्ष्मण रावण के पास जाते है।

जब रावण मृत्युशैया पर अपनी आखिरी सांसे गिन रहा था तब श्री राम ने लक्ष्मण को रावण के पास सफलता का ज्ञान लेने भेजा और लक्ष्मण रावण के सर के पास खड़े हो गए लेकिन रावण कुछ नहीं बोला, तब श्री राम मुस्कराते हुए लक्ष्मण से कहने लगे कि ज्ञान लेने के लिए चरणों में खड़ा रहना पड़ता है। उसके बाद लक्ष्मण एक बार फिर रावण के पास गए उस समय रावण ने लक्ष्मण को तीन मुख्य सीख दी थी जो इस प्रकार है -

  1. रावण ने लक्ष्मण को कहा कि 'शुभस्य शीघ्रम्’ अर्थात शुभ कार्य को जितना जल्दी हो सके कर देना चाहिए। मैंने श्री राम को पहचानने में भूल कर दी जिसके कारण मेरा यह हाल हुआ है। 
  2. दूसरी बात बताते हुए रावण बोला - कि अपने शत्रु को कभी छोटा नहीं समझना चाहिए मैं राम को तुच्छ इंसान समझता था इसलिए मैंने सोचा कि यह वानर के साथ मेरा क्या बिगाड़ सकता है। 
  3. रावण बोला कि जीवन में राज की बातें किसी को नहीं बतानी चाहिए क्योंकि भाई विभीषण मेरी मृत्यु का राज जानता था जिसके कारण मुझे मृत्युशैया पर लेटना पड़ रहा है। 

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