महाभारत के तीन शक्तिशाली योद्धा जिनको कोई हरा नहीं सकता था- जानिए क्यों ??
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महाभारत दुनिया का सबसे उत्तम एवं ज्ञानवर्धक ग्रंथ है भगवान कृष्ण स्वयं इस बात को स्वीकार करते हुए कहते है कि कलयुग के समय में कोई विरला व्यक्ति ही होगा जिसका मन भक्ति एवं ज्ञान रूपी बातों को पढ़ने में होगा। प्राचीन समय में जितने भी योद्धा उन्हें वे इतने शक्तिशाली थे कि पूरी सेना को एक ही पल में हरा सकते थे लेकिन श्राप के प्रभाव के कारण उन्हें मृत्यु को प्राप्त होना पड़ा था।
सूर्यपुत्र कर्ण
महारानी कुंती के गर्भ से मंत्र शक्ति से जन्म लेने वाले सूर्य के पुत्र दानवीर कर्ण के पास बह्रमास्त्र से भी शक्तिशाली हथियार थे, परन्तु सूत के घर में पालन होने की वजह से उन्हे राजा का दर्जा नहीं मिल पाया था। पांडवो की माता कुंती ने मंत्र शक्ति के बल से सूर्य देव का आह्वाहन किया था, तभी भगवान सूर्य ने आशीर्वाद रूप उन्हें पुत्र प्राप्ति का वरदान दे दिया था। कुंती ने लोक लाज के डर से कर्ण को गंगा में बहा दिया जो आगे चलकर अधिरथ को मिले थे।
भीष्मपिता
महाभारत के सबसे चरित्रवान पात्र भीष्मपिता ही थे, उन्होंने अपने पिता को वचन दिया था कि वे आजीवन विवाह नहीं करेंगे। भीष्म को अपने पिता से इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था जिसकी वजह से कोई योद्धा चाह कर भी उन्हें मार नहीं सकता था। दुर्योधन यह बात अच्छी तरह से जानता था इसलिए उसने भीष्म को अपनी सेना में वचनबद्ध करके शामिल किया था।
महावीर हनुमान
महाभारत ग्रंथ के कई पन्नों पर हनुमान जी का नाम आता है, पुराणों के अनुसार महावीर हनुमान दुनिया के अंत तक इस संसार में विराजित रहते है। इस संसार में कोई ऐसी ताकत नहीं है जो उनकी शक्तियों का खंडन कर सकें।
युद्ध पूरा होने के बाद अर्जुन का रथ तेज़ धमाके के साथ जल जाता है यह देखकर अर्जुन श्री कृष्ण से प्रश्न करते है, कि भगवान ऐसा कैसे हुआ? जवाब में कृष्ण कहते है कि हे अर्जुन, इस रथ पर महावीर हनुमान साक्षात विराजित थे इसी वजह से यह 18 दिनों तक युद्ध में चलता रहा, वरना यह रथ तो कब का नाश हो चुका था।
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