हमारा शरीर कुदरत का अनमोल उपहार है जिसको स्वस्थ रखना स्वयं की जवाबदारी है लेकिन कई लोग बुरी लतों में फँस जाते है जिसके कारण विकास धीमा पड़ जाता है। अगर आप वर्तमान की पीढ़ी को देखेंगे तो 70 प्रतिशत से अधिक लोग पतले दुबले मिलेंगे जिसके पीछे यह मुख्य तीन कारण छुपे हुए है इन्ही वजह से शरीर का पूर्ण विकास रुक जाता है।
1) तनाव लेना-
यह बात जगत प्रसिद्ध है कि जो लोग आवश्यकता से ज्यादा तनाव लेते है उनके दिमाग और शरीर पर दबाव पड़ता है जो शारीरिक विकास को रोक देता है। यह बात भी सही है कि आज कल कि भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव बढ़ ही जाता है लेकिन लोगो को चाहिए कि चिंता लेने के बदले उसका हल निकालने का प्रयास करें।
2) कामुक्ता-
कुदरत ने हमे जो चीज़े प्रदान की है वे सभी का हमे पूर्ण उपयोग करने का अधिकार है लेकिन कहते है कि आवश्यकता से अधिक पानी भी ज़हर बन जाता है इसलिए कम आयु में ब्रह्मचर्य का त्याग नहीं करना चाहिए क्योंकि ब्रह्मचर्य त्याग से बल की कमी होने लगती है जिसकी पृष्ठि धर्म ग्रंथों में भी की गयी है।
3) क्रोध करना-
क्रोधित व्यक्ति का कल्याण नहीं हो सकता क्योंकि क्रोध करने से न सिर्फ हमारा बल्कि सामने वाले व्यक्ति का भी नुक्सान होता है। बुद्ध के कथन अनुसार जो व्यक्ति क्रोध करता है वह जलते हुए कोयले को अपने ऊपर ही फेंकता है अर्थात आवश्यकता से अधिक क्रोध मानव के शारीरिक विकास को रोक देता है।
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