गीता में कथन है कि समय कभी स्थिर नहीं रहता, जब कोई दुखी इंसान इस गोल्डन लाइन को पढ़ता है तब उसके मन में एक ख़ुशी की लहर झूम उठती है। हर व्यक्ति किसी ना किसी कारण से दुखी होता ही है कोई भी इंसान पूरी तरह से सुखी रह ही नहीं सकता क्योंकि जब हमारी एक इच्छा पूरी होती है तो तुरंत दूसरी इच्छा जाग उठती है।
मेरे मत अनुसार हमारे दुखों का कारण हमारी इच्छा ही है क्योंकि जब हम कोई सपना देखते है और वह पूरा नहीं हो पाता तभी हमे दुःख होता है क्या आप जानते दुनिया में आधे इंसान अपने सपने(इच्छा) पूरे नहीं होने के कारण ही दुखी है।
दुःख का समय बड़ा ही विचित्र होता है दोस्तों क्योंकि इसी समय आपको अपनी कीमत समझ में आती है यही वह समय होता है जब आप लोगों को परख सकते हो, ऐसा समय आने पर ही आप यह जान सकते हो कि 99 प्रतिशत लोग सिर्फ स्वार्थ के लिए ही आपको मित्र बनाते है।
याद रखिए कि जब आपका समय ख़राब चल रहा हो, तब किसी व्यक्ति से मदद मत माँगों, क्योंकि ऐसा करने से आप दूसरों पर निर्भर हो जाते हो, शायद कुछ लोग अपने भविष्य के फ़ायदे को ध्यान में रखते हुए आपकी मदद कर भी देंगे लेकिन उसका एहसान जिंदगी भर जताते रहेंगे इसलिए खुद ही अपनी मुसीबतों से लड़ना सिखों।
जब आप अपनी मुसीबतों से लड़ना सिख जाओगे उसके बाद आपको दुःख का समय भी अच्छा लगेगा क्योंकि यह आपके लिए एक खेल बन जायेगा, बिलकुल मेरी तरह, इसलिए चिंता को छोड़ दो और खड़े हो जाओ क्योंकि कोई दुःख आप से बड़ा नहीं हो सकता।
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