महाभारत की सबसे सुंदर स्त्री द्रौपदी, जिनका जन्म माता के गर्भ से नहीं हुआ था ??
महाभारत युद्ध से पहले की बात है, जब पांडव और कौरव गुरु द्रोण के पास शिक्षा प्राप्त कर रहे थे, द्रोणाचार्य और राजा द्रुपद के बीच मन मुटाव था। पांडवों के गुरु द्रोणाचार्य ने राजा द्रुपद के अहम को तोड़ने का काम पांडवों को सौंपा। पांडवों ने पांचाल के आधे राज्य पर कब्ज़ा कर लिए और उन्हें पकड़कर द्रोणाचार्य के पास ले आए।
पांचाल नरेश राजा द्रुपद ने हार मानते हुए गुरु द्रोण से माफ़ी माँगी और अपना आधा राज्य उन्हें समर्पित कर दिया था, द्रुपद की कोई संतान नहीं थी इस वजह से वे खुद को निर्बल महसूस करते थे, ऋषिओं की आज्ञा लेकर उन्होंने बड़ा संतान प्राप्ति का यज्ञ करवाया, जिससे वे ताक़तवर संतान प्राप्त करके पांडवों और गुरु द्रोण का नाश कर सकें।
ऐसे जन्मी थी द्रोपदी
महात्मा याज ने द्रुपद के यज्ञ को पूर्ण करवाया उस यज्ञ से दिव्य कुमार प्रकट हुआ जो दिखने में ढ़ीठ होने से धृष्टद्युम्न नाम से प्रसिद्ध हुआ और उसी यज्ञ से महाभारत की सबसे सुंदर कन्या प्रकट हुई जिसका शरीर कृष्ण वर्ण(काला) का होने से कृष्णा नाम दिया गया। इस प्रकार राजा द्रुपद ने अपनी दो संतानों को उत्तपन करवाया था।
द्रुपद की पुत्री होने से इस लड़की का नाम द्रौपदी रखा गया, जब द्रौपदी का स्वयंवर रचा गया उस समय पांडव वनवास भोग रहे थे। स्वयंवर में अर्जुन भी शामिल हुए और उन्होंने द्रौपदी का स्वयंवर जीत लिया। घर जाने पर पांडवों की माँ कुंती ध्यान अवस्था में बैठी थी तभी पांडव बोले- देखो माँ आज हम भिक्षा में क्या लाए है? कुंती समझी कि पांडव भोजन लेकर आए है इसलिए उन्होंने बिना देखे कह दिया कि जो लाए हो वह मिल बाँट कर ले लो।
परन्तु बाद में कुंती को अपनी ग़लती का अहसास हुआ लेकिन यह सब कुछ देव-सयोग था इस वजह से द्रौपदी को पाँचो पांडवों की पत्नी बनना पड़ा था और वहीं उनकी महाभारत के युद्ध का कारण बनी थी। मित्रों, यदि आप भी ऐसी अनसुनी पौराणिक जानकारी पढ़ने में रूचि रखते है तो तुरंत नीचे दिया गया फॉलो एवं लाइक बटन दबाए।
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